बनो जागरूक उपभोक्ता- National Consumer Day Special
National Consumers Right Day is observed on 24 December to raise awareness about the rights of consumers and responsibilities. This is the day when the Consumer Protection Act, 1986 had received the assent of the President.
क्या आप जानते हैं..? यदि नहीं तो एक उपभोक्ता होने के नाते आपको अपने अधिकार जानने ही चाहिए । दोस्तों एक उपभोक्ता को कुछ रोचक एवं जरूरी बातें पता होने पर कभी धोखा नहीं खाएगा।
आज मैं आपसे न्याय मंच के इस अंक में उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 के बारे में बताता हूं। दोस्तों आज की इस दौड़-भाग से भरी जिंदगी में हर व्यक्ति एक उपभोक्ता तो होता ही है लेकिन उसे उपभोक्ता के अधिकार की जानकारी ना होने से या फिर यहां-वहां से आधी अधूरी जानकारी होने से वह खुद को ठगा सा महसूस करता है। कई बार तो उपभोक्ता के पास इतना समय नहीं होता है कि वह अपने अधिकार को जाने और जालसाजी में फंसने से बचें।
मैं एक अधिवक्ता एवं एक नागरिक होने के नाते आपसे कुछ रोचक एवं महत्वपूर्ण बातें साझा करना चाहता हूं।
आज हर एक व्यक्ति उपभोक्ता है। हम रोज कुछ ना कुछ खरीदते हैं या फिर कोई सर्विस (सेवाएं) लेते हैं। जैसे कि जब हम सब्जी, फल, कोई सामान खरीदते हैं या फिर सर्विस के नाम पर अपने वाहन का बीमा, इंटरनेट ब्रॉडबैंड जैसी अनेकों सर्विसेस लेते हैं लेकिन क्या होता है कि जब हमारे द्वारा खरीदे गए सामान में कोई खराबी हो और इसका पता हमें सामान लेने के बाद चले या फिर हमने किसी सर्विस के लिए रुपए दिए हैं और सर्विस प्रोवाइडर सर्विस में आनाकानी करे, इस समय हमें समझ नहीं आता है कि क्या करना चाहिए तो आइए न्याय मंच के इस अंक में मैं आपको कुछ कानूनी सलाह देता हूं जो एक उपभोक्ता के लिए अत्यंत आवश्यक है।
तो अब मन में पहला प्रश्न यही आता है कि आखिर उपभोक्ता कौन होता है.? वह व्यक्ति जो किसी सामान या वस्तु को खरीदे लेकिन उसका उपयोग है वह अपने जीवन यापन या फिर जीवन जीने के लिए करें ना कि व्यावसायिक के उपयोग के लिए, उपभोक्ता कहलाता है। यहां पर मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि शेयर मार्केट इस श्रेणी में नहीं आता है।
अब बात करते हैं कि जब खरीदी गई वस्तु या समान या हमारे द्वारा ली गई सर्विस में कोई कमी हो तब क्या करें? जब भी ऐसी शिकायत हो तब सबसे जरूरी बात है कि सामान / वस्तु की खरीदी की रसीद एवं खरीदी से संबंधित दस्तावेज को लेकर उस व्यक्ति( जहां से वस्तु/सामान खरीदा है) से पहले मौखिक परेशानी बताएं और यदि बात ना बने तो सामान की निर्माता कंपनी से सीधे संपर्क कर सकते हैं। आजकल के इस डिजिटल दौर में हम निर्माता कंपनी या फिर सर्विस प्रोवाइडर को सीधे ईमेल के माध्यम से अपनी परेशानी बता सकते हैं।
जब सूचना के बाद भी निराकरण ना हो तो जहां से वस्तु या समान खरीदा है या निर्माता कंपनी को उनके पते पर लिखित नोटिस भेज सकते हैं एवं नोटिस प्राप्ति के 30 दिन के बाद आप सीधे ही आपके जिला उपभोक्ता फोरम या फिर राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में अपनी शिकायत दर्ज करवा सकते हैं।
आप वस्तु खरीदी की रसीद ,नोटिस या शिकायत की कॉपी या फिर सर्विस के लिए कंपनी द्वारा किए गए एग्रीमेंट की कॉपी लेकर सीधे फोरम या आयोग में शिकायत कर सकते हैं वह भी मामूली न्याय शुल्क के साथ...! बस हो गया आपका काम.!
अब फोरम /आयोग की जिम्मेदारी है कि वह आपको न्याय दिलाएं एवं मुआवजा,मानसिक क्षति के साथ और यदि आप ने अधिवक्ता रखा है तो अधिवक्ता के उचित फीस भी आपको दिलाएगा।
by Sanjay
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